संसदीय समितियां

संसदीय समितियां

संसदीय समितियां

संसदीय समिति क्या है? 

  1. संसद एवं उसके कार्य बहुत बड़े एवं विस्तृत होते हैं अतः उनकी सहायता के लिए जो समिति बनाई जाती है, उन समितियों को संसदीय समिति कहते हैं।
  2. इनकी नियुक्ति या निर्वाचन लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा किया जाता है।
  3. ये लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के निर्देशानुसार कार्य करते हैं।
  4. ये अपनी रिपोर्ट सदन अथवा लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को सौंपती हैं।
  5. इनका एक सचिवालय होता है जिसकी व्यवस्था लोकसभा या राज्यसभा सचिवालय करता है।

संसदीय समितियों के प्रकार 

  1. स्थायी समितियां – स्थायी समिति स्थायी प्रकृति की होती हैं। ये निरंतरता के आधार पर कार्य करती हैं, इनका गठन प्रत्येक वर्ष अथवा समय समय पर होता है।
  2. तदर्थ समितियां – ये एक अस्थाई समिति होती है जो किसी प्रयोजन के लिए गठन की जाती है तथा प्रयोजन समाप्त होने समाप्त कर दिए जाते हैं।

स्थायी समितियों के प्रकार
1.वित्तीय समिति
लोकलेखा समिति 

  • गठन – 1921 में (भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत) 
  • वर्तमान सदस्य – 15 लोकसभा से तथा 7 राज्यसभा से 
  • चुनाव – प्रतिवर्ष, एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति द्वारा (कोई मंत्री सदस्य नहीं बन सकता)।
  • अध्यक्ष – विपक्षी दल का (1967 से) 
  • कार्य – अपव्यय, क्षति, भ्रष्टाचार और क्षमता तथा निरर्थक खर्चों के मामलों को सामने लाना।

प्राक्कलन समिति

  • गठन – 1921 में जॉन मथाई की सिफारिश पर वर्तमान सदस्य – 30 (सिर्फ लोकसभा से) 
  • चुनाव – प्रतिवर्ष, एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति द्वारा (कोई मंत्री सदस्य नहीं बन सकता)। 
  • अध्यक्ष का चुनाव – लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा 
  • कार्य – बजट में सम्मिलित प्राक्कलनो की जांच तथा सार्वजनिक व्यय में किफायत के लिए सुझाव देना।

सार्वजनिक उद्यम समिति 

  • गठन – 1964 (कृष्ण मेमन समिति के सिफारिश पर) 
  • वर्तमान सदस्य – 22 (15 लोकसभा से तथा 7 राज्यसभा से) 
  • चुनाव – प्रतिवर्ष, एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति द्वारा (कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं हो सकता)। अध्यक्ष का चुनाव – लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 
  • कार्य – सार्वजनिक उद्यमों के प्रतिवेदनों एवं लेखों की जांच करना।

2. विभागीय स्थायी समितियां

  • कार्य – संसद के प्रति कार्यपालिका को अधिक उत्तरदायी बनाना।
  • सदस्य – इसके अंतर्गत वर्तमान में कुल 24 विभाग हैं, जिसमें से 8 समितियां राज्यसभा में तथा 16 समितियां लोकसभा में कार्य करती हैं।
  • चुनाव – प्रतिवर्ष, एकल हस्तांतरणीय मत पद्धति द्वारा। 
  • अध्यक्ष का चुनाव – लोकसभा अध्यक्ष द्वारा (लोकसभा के सदस्यों में से)।

विभागीय स्थायी समितियां

  1. वाणिज्य समिति 
  2. गृह मामलों की समिति 
  3. मानव संसाधन विकास समिति 
  4. उद्योग समिति 
  5. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन समिति ६. परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति समिति 
  6. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति 
  7. कार्मिक लोक शिकायत, विधि एवं न्याय समिति।

लोकसभा के अंतर्गत 16 समितियां निम्नलिखित हैं:- 

  1. कृषि समिति 
  2. सूचना प्रौद्योगिकी समिति 
  3. रक्षा समिति 
  4. ऊर्जा समिति 
  5. विदेशी मामला समिति 
  6. वित्तीय समिति 
  7. खाद्य उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण समिति 
  8. श्रम समिति 
  9. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस समिति 
  10. रेल समिति 
  11. नगर विकास समिति 
  12. जल संसाधन समिति 
  13. रसायन एवं उर्वरक समिति 
  14. ग्रामीण विकास समिति 
  15. कोयला एवं इस्पात समिति 
  16. सार्वजनिक न्याय एवं अधिकारिता समिति

3. जांच समितियां याचिका 

  • आवेदन समिति 
  • कुल सदस्य – 25, (लोकसभा से 15 तथा राज्यसभा से 10) 
  • कार्य – यह समिति विधेयकों पर आम सार्वजनिक महत्व के मामलों में दायर याचिकाओं एवं आवेदनों पर विचार करती है। 

विशेषाधिकार समिति 

  • कुल सदस्य – 25, (लोकसभा से 15 तथा राज्यसभा से 10) 
  • कार्य – यह सदन और इसके सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन संबंधी मामलों की जांच करती है। 

आचार समिति 

  • गठन – राज्यसभा द्वारा 1997 में तथा लोकसभा द्वारा 2000 में।
  • कार्य – यह समिति संसद सदस्यों के लिए आचार संहिता तथा दुराचरण के मामलों की जांच करती है।

4. सदन समितियां अथवा सेवा समितियां
आवास समिति 

  • सदस्य – 12 (लोकसभा से) 
  • कार्य – आवासीय सुविधा तथा अन्य सुविधा (भोजन, चिकित्सा इत्यादि) देने संबंधित कार्य करती है।

सदस्यों के वेतन भत्ते के लिए संयुक्त समिति 

  • सदस्य – 15, (लोकसभा से 10 तथा राज्यसभा से  5) 
  • गठन – पेंशन अधिनियम 1954 के तहत 
  • कार्य – वेतन भत्ते तथा पेंशन संबंधित नियमावली बनाती है।

 सामान्य प्रयोजन समिति 

  • कार्य – यह समिति सदन से संबंधित ऐसे मामलों को देखती है जो अन्य संसदीय समितियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। 
  • लोकसभा एवं राज्यसभा के अध्यक्ष एवं सभापति लोकसभा एवं राज्यसभा में इस समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं। 

पुस्तकालय समिति 

  • सदस्य – 9, (लोकसभा से 6 तथा राज्यसभा से 3) कार्य – संसद के पुस्तकालय संबंधी कार्य देखती है।

5. सदन के दैनिक कामकाज से संबंधित समिति
नियम समिति 

  • सदस्य – लोकसभा से 15 (लोकसभा के अध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं) तथा राज्यसभा से 16 (राज्यसभा के सभापति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं)। 
  • कार्य – सदन में कार्य पद्धति तथा संचालन से संबंधित मामलों पर विचार  करती है। 
  • निजी सदस्यों के विधेयक तथा संकल्पों के लिए समिति 
  • सदस्य – लोकसभा से 15 (इसके अध्यक्ष लोकसभा के उपाध्यक्ष होते हैं) जबकि राज्यसभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती। 
  • कार्य – विधेयकों का वर्गीकरण तथा प्रस्तुत विधेयकों और संकल्पों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करती है। 

सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति 

  • सदस्य – लोकसभा में 15 जबकि राज्य सभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती। 
  • कार्य – सदन में सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी मामलों पर विचार तथा 60 दिन से अधिक अनुपस्थिति वाले सदस्यों की जांच करना।

कार्य सलाहकार समिति 

  • सदस्य – लोकसभा से 15 (लोकसभा अध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं) जबकि राज्यसभा से 10 (राज्यसभा के सभापति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं) कार्य – यह समिति सदन के कार्यक्रम तथा समय सारणी को नियमित रखती है। 

6. परीक्षण एवं नियंत्रण के लिए गठित समिति अनुसूचित जाति/जनजाति तथा कल्याण समिति कुल सदस्य – 30 (लोकसभा से 20 तथा राज्यसभा से 10) 

  • कार्य – अनुसूचित जाति/जनजाति राष्ट्रीय आयोग के प्रतिवेदनों पर विचार करना तथा कल्याण से संबंधित सभी मामलों की जांच करना एवं संवैधानिक एवं वैधानिक सुरक्षा एवं कल्याण कार्यक्रम का संचालन करना। 

अधीनस्थ विधायन समिति 

  • गठन – 1953 में
  • सदस्य – लोकसभा में 15 और राज्यसभा में 15 कार्य – नियम, विनियम, उपनियम तथा नियमावली बनाने के लिए कार्यपालिका को प्रतिनिधित्व अथवा संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग की जांच करना।

महिला सशक्तिकरण समिति 

  • गठन – 1997 में 
  • सदस्य – 30, (लोकसभा से 20 तथा राज्यसभा से 10) 
  • कार्य – महिलाओं की स्थिति, गरिमा तथा सभी क्षेत्रों में समानता के लिए उठाए गए कदम की जांच करना तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिवेदनों पर विचार करना। 

सरकारी आश्वासन समिति 

  • कार्य – समय समय पर मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों, वचनों एवं प्रतिज्ञाओं की जांच करना।
  • सदन के पटल पूरा स्थापित दस्तावेजों की समिति गठन – 1975 में 
  • सदस्य – लोकसभा से 15 तथा राज्यसभा से 10 कार्य – सदन के पटल में रखे गए सभी दस्तावेजों का अध्ययन करके यह देखना कि यह संविधान के प्रावधानो एवं नियमों के अनुरूप है या नहीं।

लाभ के पदों पर संयुक्त समिति 

  • सदस्य – 15 (लोकसभा से 10 तथा राज्यसभा से 5) 
  • कार्य – संसद सदस्यों के निर्वाचन के लिए उनकी सदस्यता का जांच करता है और यह देखता है कि वह लाभ के पद पर है या नहीं।

तदर्थ समितियों के प्रकार 
सलाहकार समिति 

  • कार्य – यह समिति एक ऐसा मंच प्रदान करती है जहां मंत्रियों एवं संसद के सदस्यों के बीच नीतियों एवं कार्यक्रमों के बारे में अनौपचारिक चर्चा होती है।

जांच समिति 

  • कार्य – इस समिति का गठन समय-समय पर दोनों सदनों में से किसी के भी द्वारा किसी मामले के जांच के लिए किया जा सकता है।

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