संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान की प्रमुख विशेषताएं


प्रस्तावना
भारतीय  संविधान तत्वों और मूल भावना के संबंध में अद्वितीय है हालांकि बहुत से तत्व विदेशों से लिए गए हैं परंतु फिर भी बहुत से तत्व काफी अलग हैं भारतीय मूल संविधान में अब तक कुछ संशोधनों ( 42वें 44वें 73वें 74वें  97वें ) द्वारा काफी परिवर्तन किया जा चुका है जिसमें से 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा कई बड़े परिवर्तन किए गए हैं अतः इस अधिनियम को “मिनी कॉन्स्टिट्यूशन” कहा जाता है हालांकि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान संशोधन की शक्ति प्रदान करता है परंतु केसवानंद भारती मामला 1973 में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान के मूल ढांचे में परिवर्तन का अनुमति नहीं देता.

संविधान की विशेषताएं
1- सबसे लंबा लिखित संविधान-
  • मूल संविधान 1949 में – एक प्रस्तावना 22 भाग 395 अनुच्छेद 8 अनुसूचियां थी| 
  •  वर्तमान में – एक प्रस्तावना, 26 भाग ( नए जोड़े गए भाग 4क, 9क, 9ख, 14क ) , 465 अनुच्छेद 12 अनुसूचियां (नए जोड़े गए अनुसूचियां 9, 10, 11, 12) हैं| 
भारतीय संविधान को विस्तृत करने के पीछे चार कारण-
    – भौगोलिक कारण -भारत का विस्तार एवं विविधता .
    – ऐतिहासिक कारण -1935 अधिनियम (काफी विस्तृत था).
    – केंद्र और राज्य के लिए एकल संविधान (जम्मू कश्मीर को छोड़कर ).
    – संविधान सभा में कानून विशेषज्ञों का प्रभुत्व.
2- विभिन्न स्रोतों से विहित
भारत के संविधान का निर्माण विश्व के विभिन्न संविधान को छानने के बाद हुआ है , जैसे :
  • अधिकांश ढांचागत एवं प्रशासनिक भाग – भारत शासन अधिनियम 1935 से .
  • दार्शनिक भाग (मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निदेशक तत्व ) – क्रमशः अमेरिका और आयरलैंड से.
  •  राजनीतिक भाग (संघीय सरकार, कार्यपालिका, विधायिका) – अधिकांशतः ब्रिटेन से.
  •  अन्य प्रावधान – कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, रूस फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और जापान इत्यादि से.
3 – लचीला एवं कठोर का समन्वय
भारत का संविधान लचीला और कठोर का मिलाजुला रूप है अतः अनुच्छेद 368 में दो तरह के संशोधनों का प्रावधान है तथा एक और प्रावधान है जो अनुच्छेद 368 के बाहर है | 
  • साधारण बहुमत- सदन में उपस्थित सदस्यों में से 50% से अधिक सदस्यों का मत होना चाहिए (गणपूर्ति जरूरी है).
  • विशेष बहुमत (अनुच्छेद 368 के तहत) – सदन में उपस्थित कुल सदस्यों का दो तिहाई बहुमत मिलना चाहिए और  यह सदन के कुल सदस्यों का 50% से अधिक होना चाहिए.
  • संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पास होना चाहिए तथा आधे से अधिक राज्यों का साधारण बहुमत भी मिलना चाहिए.
4 – एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था 
* एकात्मक लक्षण 
  • एक सशक्त केंद्र
  •  एक संविधान 
  • एकल नागरिकता
  •  संविधान का लचीलापन 
  • एकीकृत न्यायपालिका 
  • केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति 
  • अखिल भारतीय सेवाएं 
  • आपातकालीन प्रावधान 
*संघात्मक लक्षण 
  • दो सरकार
  •  शक्तियों का विभाजन
  •  लिखित संविधान 
  • संविधान की सर्वोच्चता
  •  संविधान की कठोरता
  •  स्वतंत्र न्यायपालिका 
  • द्विसदनीयता
5 – सरकार का संसदीय रूप 
    – भारतीय संविधान ने अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली की बजाय ब्रिटेन के संसदीय तंत्र को अपनाया है
    – संसदीय व्यवस्था विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय और सहयोग के सिद्धांत पर आधारित है 
    – अध्यक्षीय प्रणाली विधायिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत पर आधारित है 
    – संसदीय प्रणाली को वेस्टमिंस्टर मॉडल, उत्तरदाई सरकार, प्रधानमंत्री सरकार या मंत्रिमंडलीय सरकार के           रूप से जाना जाता है
    – भारत में संसदीय प्रणाली केंद्र और राज्य दोनों जगह है 
भारत में संसदीय प्रणाली की विशेषताएं 
  • वास्तविक एवं नाम मात्र के कार्यपालकओं की उपस्थिति 
  • बहुमत वाले दल की सत्ता 
  • विधायिका के समक्ष कार्यपालिका की संयुक्त जवाबदेही 
  • विधायिका में मंत्रियों की सदस्यता
  •  प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री का नेतृत्व
  •  निचले सदन का विघटन
ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से भिन्नता 
    – ब्रिटेन के संसद की तरह भारत का संसद संप्रभु नहीं है 
    – भारत का प्रधान निर्वाचित (गणतंत्र ) होता है जबकि ब्रिटेन का उत्तराधिकारी व्यवस्था है
6 – संसदीय संप्रभुता एवं न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय

  • संसदीय संप्रभुता – ब्रिटेन से (हालांकि थोड़ा भिन्न है)
  • न्यायिक सर्वोच्चता – अमेरिका से (हालांकि थोड़ा भिन्न है ) अमेरिका में विधि के नियत प्रक्रिया है, भारत में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया है
 भारत में इन दोनों के बीच संतुलन या समन्वय है जैसे :- 
  • सर्वोच्च न्यायालय संसदीय कानूनों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है 
  • संसद संविधान के बड़े भाग को संशोधित कर सकता है 
7 – एकीकृत व स्वतंत्र न्यायपालिका
* एकीकृत 
  • शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय , राज्य में उच्च न्यायालय , जिला में जिला न्यायालय , इसके बाद अधीनस्थ न्यायालय . यह सभी एकल तंत्र हैं जो केंद्रीय कानूनों और राज्य कानूनों दोनों को लागू करता है , जबकि अमेरिका में संघीय कानूनों को संघीय न्यायालय तथा राज्य कानूनों को राज्य न्यायालय लागू करता है .
  • उच्चतम न्यायालय देश के सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की रक्षा की गारंटी देता है साथ ही संविधान का संरक्षक है .
*स्वतंत्र 
  • न्यायाधीशों के कार्यकाल की सुरक्षा
  •  न्यायाधीशों के लिए निर्धारित सेवा शर्तें 
  • भारत की संचित निधि से उच्चतम न्यायालय के सभी खर्चों का वाहन 
  • विधायिका में न्यायाधीशों के कामकाज पर चर्चा पर रोक
  •  सेवानिवृत्ति के बाद अदालत में कामकाज पर रोक
  •  अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति
  •  कार्यपालिका से न्यायपालिका को अलग रखना.
8 – मौलिक अधिकार
     संविधान के तीसरे भाग में छह मौलिक अधिकार हैं:-
  •  समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से 18)
  • स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22)
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार(अनुच्छेद 23, 24)
  •  धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28)
  • सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार(अनुच्छेद 29, 30)
  •  संवैधानिक उपचारों का अधिकार(अनुच्छेद 32)
  • यह कार्यपालिका एवं विधायिका के मनमाने कानून के विरुद्ध नागरिकों का अधिकार है 
  • मौलिक अधिकारों के हनन पर उच्चतम न्यायालय जाया जा सकता है और उच्चतम न्यायालय 5 प्रकार के रिट जारी कर सकते हैं जैसे:- बंदी प्रत्यक्षीकरण ,परमादेश, प्रतिषेध , अधिकार परीक्षा और उत्प्रेषण.
  • मौलिक अधिकारों से संबंधित कानून संसद बना सकता है , इसमें कटौती या इसे समाप्त भी कर सकता है.
9 –  राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत 

  • यह भाग 4 में है (अनुच्छेद 36 से 51), इन्हें तीन वर्गों में बांटा गया है:- सामाजिक, गांधीवादी और उदार बौद्धिक 

उद्देश्य

  • सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देना कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना यह राज्य का नैतिक कर्तव्य है परंतु गैर न्यायोचित है |
  • मिनर्वा मिल्स मामला 1980 में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविधान की नींव मौलिक अधिकार एवं नीति राज्य के नीति निदेशक तत्व के संतुलन पर रखी गई हैं .
10 – मौलिक कर्तव्य
 मूल संविधान में मौलिक कर्तव्य नहीं था , इसे स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिश पर 1976 में 42वां संविधान संशोधन अधिनियम के तहत संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 51 के अंतर्गत 10 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया बाद में 2002 में 86 वा संविधान संशोधन अधिनियम के तहत 11वां मूल कर्तव्य को जोड़ा गया.
यह भी गैर न्यायोचित है | 
11 – एक धर्मनिरपेक्ष राज्य 
राज्य का कोई धर्म नहीं है और राज्य के लिए सभी धर्म एक समान हैं
 इसकी पुष्टि कहां-कहां होती है :- प्रस्तावना में,  अनुच्छेद 14 ,15 ,16 ,25 ,26 ,27 ,28 ,29, 30 और 44 में | 
12 –  सार्वभौम व्यस्क मताधिकार
  •  भारत में चुनाव का आधार व्यस्त मताधिकार है जो धर्म ,जाति ,लिंग ,साक्षरता और संपदा के आधार पर भेदभाव नहीं करता
  •  शुरुआत में उम्र 21 वर्ष  था , 61वा संविधान संशोधन अधिनियम 1988 के द्वारा 18 वर्ष (वर्तमान ).
व्यस्क मताधिकार लोकतंत्र को मजबूती देता है कैसे?
    – जनता के स्वाभिमान में वृद्धि करता है 
    – समानता के सिद्धांत को लागू करता है –अल्पसंख्यकों को अपने हितों की रक्षा का अवसर देता है 
    – कमजोर वर्गों में नई आशा और प्रत्याशा जगाता है -यह एक कानूनी अधिकार है जो भाग 15 के अनुच्छेद           326 में शामिल है .
13 – एकल नागरिकता 
       यद्यपि भारत एवं दोनों का प्रतिनिधित्व करता है परंतु नागरिकता के संबंध में देखें तो भारत में एकल               नागरिकता का प्रावधान है जबकि अमेरिका में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है| 
14  –  स्वतंत्र निकाय 
          हमारा संविधान कई स्वतंत्र निकाय की स्थापना करता है जैसे निर्वाचन आयोग संघ लोक सेवा आयोग              राज्य लोक सेवा आयोग इत्यादि | 
15 – आपातकालीन प्रावधान 
देश में कोई आपातकाल की स्थिति उत्पन्न होने पर भारतीय संविधान ने राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्तियां दी है .
उद्देश्य – देश की संप्रभुता एकता अखंडता और सुरक्षा . संविधान एवं देश के लोकतंत्र लोकतांत्रिक ढांचे को सुरक्षा प्रदान करना है .
प्रकार – 1) राष्ट्रीय आपातकाल (बाह्य युद्ध ) -अनुच्छेद 352 के तहत
            2) राज्य में आपातकाल (आंतरिक, राष्ट्रपति शासन) -अनुच्छेद 356 के तहत
            3) वित्तीय आपातकाल( देश में वित्तीय अस्थिरता)-अनुच्छेद 307 के तहत.
 क्या होता है ?
बिना किसी संविधान संशोधन की देश का ढांचा संघीय से एकात्मक हो जाता है , जो एक अद्वितीय विशेषता है 
16 – त्रिस्तरीय सरकार 
     – मूल संविधान में भारत में दो स्तरीय राज्य व्यवस्था थी (केंद्र और राज्य )
     – 73वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के तहत पंचायत को भाग 9 एवं अनुसूची 11 में जोड़ा गया.             -74वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के तहत नगरपालिका को भाग 9(क) एवं अनुसूची 12 में जोड़ा           गया 
    अतः अब इकलौते भारत में तीन स्तरीय सरकार हैं.
17 –  सहकारी समिति
  •  मूल संविधान में नहीं था 
  • 97वा संविधान संशोधन अधिनियम 2011 के तहत भाग(ख) में, मौलिक अधिकार में अनुच्छेद19 में तथा राज्य के नीति निदेशक तत्व के अंतर्गत अनुच्छेद 43(ख) मे भी जोड़ा गया.
  •  इससे संबंध इसके संबंध में कानून बनाने का अधिकार संसद को है .
संविधान की आलोचना 
  • उधार का संविधान 
  • 1935 अधिनियम की कार्बन कॉपी 
  • भारतीय अथवा भारतीयता विरोधी
  •  गांधीवाद से दूर संविधान
  •  महाकाय आकार 
  • वकीलों का स्वर्ग

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