संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र

संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र


संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र


अनुछेद -1

  • भारत अर्थात इंडिया राज्यों का एक संघ होगा | 
  •  यहअनुच्छेद दो बातों को स्पष्ट करती हैं देश का नाम और राज्य पद्धति या शासन पद्धति का प्रकार (जो संघात्मक है )|
  •  संघ की परिभाषा– बीआर अंबेडकर के अनुसार -भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, अमेरिका की तरह |
  •  राज्यों को संघ से विभक्त होने का कोई अधिकार नहीं है |
  • पूरा देश एक है जो विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक सुविधा के लिए बटा है
भारतीय क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटा गया है
  • राज्य – 28
  • संघ क्षेत्र -9
  •  अधिग्रहित क्षेत्र – दादर नगर हवेली, गोवा, दमन दीव, पुदुचेरी और सिक्किम |
 राज्य दो प्रकार के हैं
  • पूर्ण राज्य और विशेष राज्य विशेष राज्य – गाडगिल फार्मूला के अनुसार जो राज्य अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, बिजली-पानी को जुटा पाने में असमर्थ हो वैसे राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा |
  •  विशेष राज्य का दर्जा दो अनुच्छेद के तहत दिया जाता है , अनुच्छेद 370 के तहत – जम्मू कश्मीर को दिया गया है और अनुच्छेद 371 के तहत – सेवन सिस्टर्स ,उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को दिया गया|
अनुच्छेद 2 :-
  • नए क्षेत्रों (बाहरी क्षेत्रों) का भारत संघ में विलय – संसद द्वारा .

अनुच्छेद 3:-

  • नए राज्यों का निर्माण सीमाओं तथा नाम में परिवर्तन – संसद द्वारा

 शर्त  

  1. परिवर्तन से संबंधित कोई भी अध्यादेश राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही संसद में पेश किया जाएगा     -राष्ट्रपति उस अध्यादेश को संबंधित राज्य के विधान मंडल का मत जानने के लिए भेजते हैं |
  2. विधानमंडल के मत को मानने के लिए राष्ट्रपति या संसद बाध्य नहीं है |
अनुच्छेद 4 :-
  • अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत जो कुछ भी होगा वह अनुच्छेद 368 के अंतर्गत नहीं माना जाएगा बल्कि यह संसद के सामान्य बहुमत के द्वारा होगा |
राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित इतिहास :-
  • भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत भारत और पाकिस्तान बना, उस समय भारतीय भौगोलिक सीमा के अंदर 552 देसी रियासतें थी जिन्हें तीन विकल्प दिए गए भारत में शामिल होना, पाकिस्तान में शामिल होना या स्वतंत्र रहना. 549 भारत में शामिल हो गए तीन ने इंकार कर दिया कुछ समय बाद हैदराबाद पुलिस कार्यवाही द्वारा, जूनागढ़ जनमत संग्रह द्वारा और जम्मू कश्मीर विलय पत्र द्वारा भारत में शामिल हुए |
  • अब भारत में राज्यों को निम्न भागों में वर्गीकृत किया गया–
                    भाग (क) – ब्रिटिश गवर्नर के अंतर्गत शासित राज्य
                    भाग (ख) – राजा द्वारा प्रशासित राज्य 
                    भाग (ग) – ब्रिटिश आयुक्त वाले राज्य 
                    भाग (घ) – अंडमान निकोबार (केंद्र शासित प्रदेश के रूप में) .
           परंतु 1940 से ही भाषा के आधार पर पुनर्गठन की मांग उठने लगी थी अतः
           जून 1940 में एस.के. धर समिति का गठन हुआ दिसंबर 1948 में इस समिति का रिपोर्ट आया रिपोर्ट के             अनुसार – प्रशासनिक सुविधा के अनुसार प्रांतों का गठन होना चाहिए ना की भाषा के आधार पर
           इससे असंतोष और बढ़ा तब भारत सरकार ने दिसंबर 1948 में जेवीपी समिति का गठन किया अप्रैल 1949 में इसका रिपोर्ट आया इसने भी भाषा पर आधारित पुनर्गठन को नहीं स्वीकारा |
  • अक्टूबर 1953 में भारत सरकार को भाषा के आधार पर मद्रास से अलग करके आंध्र प्रदेश का गठन करना पड़ा कारण था पोट्टी श्रीरामलू के 56 दिनों के भूख हड़ताल के बाद मृत्यु |
  •  दिसंबर 1953 को फजल अली समिति का गठन हुआ जिसके अन्य 2 सदस्य के.एम. पानीकर और एच.एन.कुंजरू थे |
  • इसने अपने रिपोर्ट में  भाषा के आधार पर पुनर्गठन को स्वीकृति दे दी परंतु ‘एक राज्य एक भाषा’ के सिद्धांत को hue किया ,परिणामस्वरूप 1 नवंबर 1956 को भारत में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश का गठन हुआ 1956 के बाद और भी राज्य बने वर्तमान में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश है कई राज्यों के नामों को भी परिवर्तित किया गया |

Leave a Comment