संघीय व्यवस्था

संघीय व्यवस्था

संघीय व्यवस्था
संघीय व्यवस्था

  • सरकार को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है – एकल (एकात्मक) सरकार व संघीय सरकार एकल या एकात्मक सरकार वह सरकार है जिसमें समस्त शक्तियां एवं कार्य केंद्रीय सरकार और क्षेत्रीय सरकार में निहित होती है |
  • दूसरी ओर संघीय सरकार वह सरकार है जिसमें शक्तियां, संविधान द्वारा केंद्र सरकार एवं क्षेत्रीय सरकार में विभाजित होती हैं |
संघीय सरकार की विशेषताएं
  • दोहरी सरकार – संविधान में केंद्र और राज्य दोनों को अपने क्षेत्रों में संप्रभु शक्तियां प्रदान की गई हैं |
  • लिखित संविधान – यह एक लिखित संविधान हैशक्तियों का विभाजन – केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है. सातवीं अनुसूची में केंद्र राज्य एवं दोनों से संबंधित सूची निहित है |
  • संविधान की सर्वोच्चता – संघीय व्यवस्था में संविधान ही सर्वोच्च होता है अतः सरकार के विभिन्न घटकों (विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका) को संविधान द्वारा विधित क्षेत्र के अंतर्गत ही कार्य करना चाहिए |
  • कठोर संविधान – इस व्यवस्था में संविधान का संशोधन इस सीमा तक कठोर है किशन की संरचना केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारों की समान संस्तुति से ही संशोधित किए जा सकते हैं अन्यथा नहीं |
  • स्वतंत्र न्यायपालिका – इस व्यवस्था में नेपाली का कोर्स स्वतंत्र रखा गया है ताकि वह संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखें तथा केंद्र एवं राज्य के बीच विवादों का निपटारा कर सके |
  • द्विसदनीयता – संविधान ने द्विसदनीय विधायिका की स्थापना की है — उच्च सदन (राज्यसभा) और निम्न सदन (लोकसभा) |

एकात्मक सरकार की विशेषताएं 

  • सशक्त केंद्र 
  • राज्य अनश्वर नहीं 
  • एकल संविधान 
  • संविधान का लचीलापन 
  • राज्य प्रतिनिधित्व में समानता का अभाव आपातकालीन उपबंध 
  • एकल नागरिकता 
  • एकीकृत न्यायपालिका 
  • अखिल भारतीय सेवाएं 
  • एकीकृत लेखक जांच मशीनरी 
  • राज्य सूची पर संसद का प्राधिकार 
  • राज्यपाल की नियुक्ति 
  • एकीकृत निर्वाचन मशीनरी 
  • राज्यों के विधेयकों पर वीटो

संघीय व्यवस्था का आलोचना

भारत का संविधान जो कि संघीय है स्वीटजरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की तरह एक परंपरागत संघीय व्यवस्था से भिन्न संविधान है और इसमें कई एकात्मक या गैर संघीय विशेषताएं हैं जैसे – केंद्र के पक्ष में शक्ति का संतुलन है. यह संविधान विशेषज्ञों द्वारा भारतीय संविधान के संगीत चरित्र को चुनौती देने के लिए पर्याप्त है |

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