ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति
ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति काफी अत्यंत दयनीय स्थिति थी एक तरफ भारत के सबसे बड़े साम्राज्य मुगल साम्राज्य का पतन होना शुरु हो चुका था तथा दूसरी तरफ भारत की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं महिलाओं की स्थिति भी काफी सोचनीय थी। अंग्रेजों ने भारत की इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, भारत पर शासन स्थापित करने का निर्णय लिया और अपने साम्राज्य विस्तार को चरम तक ले गए। इस अध्याय में हम यही देखने वाले हैं कि भारत में ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति कैसी थी?

मुगल साम्राज्य की स्थिति

1707 ईस्वी में औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात मुगल साम्राज्य में योग्य उत्तराधिकारी का अभाव हो गया तथा मुगल साम्राज्य में उत्तराधिकार की जबरदस्त लड़ाई होने लगी। मुगल सम्राट मुहम्मद शाह के शासनकाल में अवध, हैदराबाद, बंगाल तथा कर्नाटक राज्यों ने स्वतंत्र राज्य/उत्तराधिकारी राज्य का स्थापना कर लिया।
इसके पश्चात मुगलों से स्वतंत्र होने वाले कई राज्य सामने आए जैसे –

  1. उत्तराधिकारी राज्य – जो मुगल साम्राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण से छूट गए (जैसे – अवध, बंगाल, हैदराबाद)
  2. स्वतंत्र राज्य – जो प्रमुख रूप से मुगल साम्राज्य का प्रांतों पर नियंत्रण में कमी के कारण सामने आए (जैसे – मैसूर, केरल, राजपूत राज्य)
  3. मुगलों के विरुद्ध विद्रोहियों द्वारा स्थापित ने राज्य (जैसे – मराठा राज्य, पंजाब राज्य, जाट राज्य)

कुछ स्वतंत्र राज्य एवं उसके संस्थापक

अवध – शआदत खान
हैदराबाद – चीनकिलिच खान
बंगाल – मुर्शीदकुली खान
कर्नाटक – सादुतुल्ला खान

भारत की सामाजिक स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति जिस समय ब्रिटिश साम्राज्य स्थापित हो रहा था उस समय भारत की सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी। भारत की इस स्थिति ने ब्रिटिशों के मनोबल को और बढ़ाया ताकि वे भारत में अपना साम्राज्य स्थापित कर सके और विस्तार कर सकें। निम्नलिखित कुछ बिंदुओं के माध्यम से हम तात्कालिक भारत की सामाजिक स्थिति को समझ सकते हैं-
• आम जनता एवं किसानों पर अत्यधिक अत्याचार एवं शोषण का होना।
• संगठित राष्ट्र की भावना का अभाव।
• दास व्यापार की प्रथा का चलन।

भारत की आर्थिक स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत में अंग्रेजों के साम्राज्य विस्तार में भारत की आर्थिक स्थिति ने भी काफी मदद की क्योंकि इस समय भारत की आर्थिक स्थिति काफी डगमगा चुकी थी। इससे ब्रिटिशों को साम्राज्य विस्तार के दौरान शक्तिशाली विरोधों का सामना नहीं करना पड़ा। निम्नलिखित कुछ बिंदुओं के माध्यम से हम तात्कालिक भारत की आर्थिक स्थिति को समझ सकते हैं-
• विदेशी व्यापारियों के द्वारा भारत के धन संपदा का अत्यधिक दोहन करना।
• विदेशी आक्रमणकारियों के द्वारा भारतीय धन संपदा की अत्यधिक लूट।
• अंग्रेजों के आधिपत्य में जमींदारों द्वारा बढ़ाए गए करों ने आम जनता एवं किसानों की कमर तोड़ दी।
• यूरोपीय वस्तुओं के आने से भारतीय उत्पादों की मांग कम हो गई।
• भारत से निर्यात होने वाले कच्चे मालों का उचित मूल्य न मिल पाना।

भारत की धार्मिक स्थिति

यूरोपीय कंपनियों ने भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए भारत में धार्मिक मतभेद फैलाने के भरपूर प्रयास किए, और अंतत: बहुत हद तक सफल भी हुए। अंग्रेजों ने तो भारत में शासन स्थापित करने हेतु अपना मुख्य हथियार ही ‘भारत में फूट डालो और शासन करो’ को चुना था जिसके अंतर्गत धार्मिक फूट डालना भी शामिल था।औरंगजेब की धार्मिक नीति ने मराठों, सिखों, जाटों और राजपूतों को नाराज कर दिया जिससे अंततः विद्रोह उत्पन्न हुआ और इसका फायदा अंग्रेजों को हुआ।

भारत की राजनीतिक स्थिति

18 वीं शताब्दी में भारत की राजनीतिक स्थिति काफी अस्थिर हो चुकी थी, खासकर 1707 ईस्वी में मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य मुगल साम्राज्य का पतन होना शुरु हो गया था। मुगल साम्राज्य के कई राज्य स्वतंत्र हो गए थे और कई राज्य स्वतंत्र होने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद उत्तराधिकार के लिए काफी युद्ध होने लगे थे। इन कारणों ने भारत की राजनीतिक स्थिति को और कमजोर कर दिया और इससे ब्रिटिशों को भारत में शासन स्थापित करने की प्रेरणा मिली।

भारत की सांस्कृतिक स्थिति

वैसे तो भारत की संस्कृति हमेशा से काफी धनी रही है परंतु 18वीं शताब्दी में कुछ मामलों में भारत की संस्कृति यूरोपीय संस्कृति से पिछड़ी हुई दिखाई देती है, और वह है भारत में तरह-तरह की कुरीतियों जैसे – सती प्रथा, बाल विवाह इत्यादि का होना एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में पिछड़ापन। इससे भारत की उत्पादकता में कमी आई और साथ ही साथ कठिन यूरोपीय प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ा। इससे भारत के जो छोटे-मोटे हस्तशिल्प उद्योग थे, समाप्त हो गए तथा जो बच गए उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं हो पाई।

भारतीय महिलाओं की स्थिति

ब्रिटिश विजय के समय भारत की स्थिति – इस समय भारत में पितृसत्तात्मक परिवार व्यवस्था थी जिसके कारण महिलाओं का समाज में स्थान बहुत अच्छा नहीं था। कुछ बिंदुओं द्वारा हम महिलाओं की स्थिति का आकलन कर सकते हैं-
• महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा का प्रचलन था।
• गरीब परिवारों की महिलाएं आजीविका के लिए घर से बाहर काम करने के लिए जाती थी।
• सती प्रथा, बाल विवाह एवं बहुविवाह जैसी शोषक सामाजिक प्रथाओं एवं परंपराओं का प्रचलन था।
• हिंदू विधवा महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय थी।
• दहेज जैसी शोषक प्रथा का प्रचलन था।

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