जनहित याचिका

जनहित याचिका (Public Interest Litigation)

जनहित याचिका की शुरुआत

जनहित याचिका की शुरुआत

जनहित याचिका क्या है?

  • जनहित याचिका पारंपरिक रूप से केवल वही व्यक्ति संवैधानिक उपचार के लिए न्यायालय जा सकता था जिसके अधिकारों का हनन हुआ हो परंतु जनहित याचिका के जरिए इसके स्वरूप को बदला गया इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति, संगठन या समूह को अधिकार दिलाने के लिए न्यायालय जा सकता है।

जनहित याचिका के उद्देश्य

  • सभी वर्गों को खासकर सामाजिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को न्याय उपलब्ध कराना।
  • मौलिक अधिकारों की रक्षा करना या हनन होने से बचाना।
  • संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर आवाज उठाना।
  • सार्वजनिक हित की रक्षा करना।

जनहित याचिका की विशेषताएं

  • इसके माध्यम से गरीब एवं कमजोर वर्ग के लोगों तक न्याय की प्रभावशाली पहुंच बनाई जा सकती है।
  • इसे किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति संगठन या समूह के अधिकारों के लिए न्यायालय में दाखिल किया जा सकता है।
  • यह सभी वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा करती है तथा उन तक न्याय की प्रभावशाली पहुंच सुनिश्चित करती है।
  • जनहित याचिका के दौरान न्यायालय की भूमिका उसकी पारंपरिक कार्यवाही ओं की तुलना में अधिक मुखर होती है।

किन-किन मामलों में जनहित याचिका लगाये जा सकते हैं?

  • पुलिस उत्पीड़न मामले में ।
  • दंगा पीड़ित याचिका एवं परिवार पेंशन के मामले में।
  • बंधुआ मजदूरों के मामले में ।
  • पर्यावरण संरक्षण संबंधी मामले में ।
  • महिलाओं पर अत्याचार के मामले में।
  • उपेक्षित बच्चों के मामले में ।
  • श्रमिकों के शोषण एवं श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामले में ।
  • ग्रामीणों से सह ग्रामीणों द्वारा उत्पीड़न के मामले में।

किन-किन मामलों में जनहित याचिका नहीं लगाये जा सकते हैं?

  • न्यायालयों से जल्दी सुनवाई के मामले में।
  • सेवा संबंधी मामलों में (वेतन, पेंशन इत्यादि)।
  • शैक्षणिक संस्थाओं में नामांकन के मामले में।
  • किराए से संबंधित किरायेदारों के मामले में।

जनहित याचिका के दुरुपयोग को कैसे रोका जा सकता है?

  • न्यायालय सुनवाई के पहले याचिका के अंतर्वस्तु की परिशुद्धता के बारे में आश्वस्त हो ले।
  • न्यायालय सिर्फ जरूरी याचिकाओं को प्रोत्साहन दें तथा गैरजरूरी याचिकाओं को प्रोत्साहन न दें।
  • न्यायालय को याचिकाकर्ता के विश्वसनीयता की सत्यापन कर लेना चाहिए।
  • न्यायालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यवसायिक निकायों द्वारा गलत इरादों से दायर या जनहित के विरूद्ध दायर याचिकाओं पर भारी जुर्माना या निश्चित सुनवाई का प्रावधान हो।

Leave a Comment