ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • भारत में अंग्रेजों का आगमन 1600 ईस्वी मेंईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में हुई थी |  ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के एक चार्टर के तहत हुई  जिसका उद्देश्य व्यापार करना था |
  • 1757 में प्लासी का युद्ध हुआ जिसमें अंग्रेजों को सफलता मिली|
  •  1764 में बक्सर का युद्ध हुआ इसमें भी अंग्रेजों को सफलता मिली|
  • 1934 में पहली बार संविधान  सभा का सुझाव एम. एन. राय ने दिया था | 
  • 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ |
  •  26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ |   

      1773 का रेगुलेटिंग एक्ट

            महत्व 
  1.  ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित व नियंत्रित करना | 
  2.  ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक एवं राजनैतिक कार्यों को मान्यता मिली | 
  3.   भारत में केंद्रीय प्रशासन की शुरुआत | 

            विशेषताएं 

  1. बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाया गया जिसमें पहले गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग बने और इसकी सहायता के लिए 4 सदस्य ही कार्यकारी परिषद की भी गठन की गई | 
  2. मद्रास और बंबई के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया | 
  3. 1774 में कोलकाता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई जिसके प्रथम जज एलिजाह   ईम्पऐ    बने और इनकी सहायता के लिए तीन अन्य जजों की नियुक्ति की गई | 
  4. ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों एवं अधिकारियों का निजी व्यापार, भारतीयों से उपहार व रिश्वत लेना प्रतिबंधित कर दिया गया |
  5. ब्रिटिश सरकार ने कोर्ट ऑफ  डायरेक्टर के नाम से एक गवर्निंग बॉडी की स्थापना की जिसका काम ईस्ट इंडिया कंपनी पर नियंत्रण करना था  | 

        1781 का एक्ट

  • इस एक्ट को रेगुलेटिंग एक्ट में कुछ सुधार करने के लिए लाया गया था

       1784 का पिट्स इंडिया एक्ट

          केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत की गई जिसके अंतर्गत निदेशक मंडल( B.O.D. ) एवं नियंत्रण            मंडल (C.O.D. ) नामक दो गवर्निंग बॉडी का गठन किया गया | 
          निदेशक मंडल का कार्य व्यापारिक मामलों की देखरेख करना था |
          नियंत्रण मंडल का कार्य राजनीतिक मामलों की देखरेख करना था |
       
      1793 का चार्टर 
          इसके तहत ब्रिटिश सरकार का यह आदेश आया कि ब्रिटिश कर्मचारियों एवं अधिकारियों का वेतन                    भारतीय राज्यकोश से दिया जाएगा | 
     
     1813 का चार्टर एक्ट
          इसके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त किया गया | 
     
     1833 का चार्टर एक्ट 
  •  बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया जिसमें भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक बने और  संपूर्ण विधाई  एवं प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति इसके अंतर्गत कर दी गई | 
  • सिविल सेवा के प्रतियोगिता आयोजन का प्रथम प्रयास किया गया परंतु नियंत्रण मंडल के विरोध के कारण यह नहीं हो पाया | 

      1853 का चार्टर एक्ट

  • भारत के गवर्नर जनरल की जो परिषद थी उसमें 6 नए पार्षद शामिल करके एक नया परिषद बनाया गया तथा अब  एवं विधाई  प्रशासनिक कार्यों को अलग कर दिया गया यह   विधान परिषद छोटी ब्रिटिश संसद के जैसे काम करती थी भारतीय केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारंभ किया गया छह  पार्षदों में से चार बंगाल मद्रास मुंबई और आगरा से लिए गए |
  • ईस्ट इंडिया कंपनी के महत्वपूर्ण पदों हेतु सिविल सेवा प्रतियोगिता भारतीयों के लिए भी शुरू कर दी गई इसके लिए मैंकाले समिति की गठन की गई | 
  • ईस्ट इंडिया कंपनी को पहले की तरह निश्चित समय नहीं दिया गया अर्थात अब यह किसी भी समय समाप्त किया जा सकता था | 

    1857 की महान क्रांति

   
    1858 का भारत शासन अधिनियम
  • भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण से सीधा ब्रिटिश राजशाही को  हस्तांतरित हो गई | 
  • भारत का शासन सीधा महारानी विक्टोरिया के हाथ में आ गया एवं भारत का गवर्नर जनरल बदलकर भारत का वायसराय बना दिया गया और पहले  वायसराय लॉर्ड कैनिंग बने | 
  • केंद्र में द्वैध शासन को समाप्त किया गया एवं मुगल सम्राट का पद भी समाप्त किया गया | 
  • भारत के राज्य सचिव का सृजन किया गया और इसकी सहायता के लिए 15 सदस्यों की  भारत परिषद का गठन किया गया इसे भारत और इंग्लैंड में मुकदमा करने का अधिकार था और इस पर भी मुकदमा किया जा सकता था यह ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था |

   1861 का भारत परिषद अधिनियम

    • विधान परिषद में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत की गई|
    • मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसीओं को विधाई शक्तियां पुनः देकर विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई |
    • इसने वायसराय को परिषद में कार्य संचालन के लिए अधिक नियम और आदेश बनाने की शक्तियां प्रदान की |
    • वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्तियां दी गई |
      1873 का अधिनियम
    • इसके तहत कहा गया कि ईस्ट इंडिया कंपनी को कभी भी भंग किया जा सकता है अंततः 1 जनवरी 1884 को ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया |
      1876 का शाही उपाधि अधिनियम
    • 28 अप्रैल 18 सो 76 को महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित किया गया |
    1892 काभारत परिषद अधिनियम
    • केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में अतिरिक्त (गैर सरकारी ) सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई , उन्हें बजट में बहस करने का अधिकार दिया गया,  कार्यपालिका  से भी प्रश्न पूछने का अधिकार  दिया गया |
    • गैर सरकारी सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय विधान परिषद में वायसराय द्वारा तथा प्रांतीय विधान परिषद में अन्य संस्थाओं जैसे जिला परिषद नगर पालिका व्यापार संघ इत्यादि के द्वारा किए जाने की घोषणा की गई |

    1909 का भारत शासन अधिनियम (मार्ले मिंटो सुधार)

    • मार्ले – इंग्लैंड में भारत के राज्य सचिव ,  मिंटो – भारत का वायसराय |
    • केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों के आकार में काफी वृद्धि की गई,  केंद्रीय विधान परिषद में सरकारी बहुमत बना रहा जबकि प्रांतीय विधान परिषद में गैर सरकारी सदस्यों के बहुमत की अनुमति दी गई |
    •  पहली बार किसी भारतीय को वायसराय की कार्यपालिका परिषद का सदस्य बनाया गया (सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा) |
    • मुस्लिमो के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया , सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक –  लॉर्ड मिंटो |
    • गैर सरकारी सदस्यों को भी बजट पर वाद-विवाद, प्रस्ताव पेश करना , प्रश्न पूछने और मत देने का अधिकार दिया गया |
    1919 का भारत शासन अधिनियम (मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार ) 
    • मांटेग्यू  – इंग्लैंड में भारत के राज्य सचिव |
    • चेम्सफोर्ड – भारत के वायसराय |
    • केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई  |
    1. राज्य परिषद (उच्च सदन ) 
    2.  केंद्रीय विधानसभा (निम्न सदन)
          इन दोनों में एक अंतर यह था कि बजट पर स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार निम्न सदन को था|
    •  प्रांतों में द्वैध शासन अर्थात प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया-
          1. आरक्षित –  गवर्नर का शासन , कार्यपालिका  परिषद की सहायता से |
          2. हस्तांतरित – गवर्नर का शासन ,भारतीय मंत्रियों की सहायता से जो प्रातीय विधान परिषद के प्रति                    उत्तरदाई थे|
          प्रांतों में द्वैध शासन के जनक –  लियोनस कर्टियस |
    • दोनों सदनों के बहुसंख्यक सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन के द्वारा चुने जाएंगे ,महिलाओं को भी मत देने का अधिकार दिया गया .
    • वायसराय की कार्यकारी परिषद के 6 सदस्यों में से 3 सदस्यों का भारतीय होना आवश्यक था (commander-in-chief को छोड़कर ) |
    • सांप्रदायिक चुनाव को और बढ़ावा दिया गया (जैसे- सिख , ईसाई , आंग्ल भारतीय , यूरोपियों का चुनाव)|
    •  लंदन में भारतीय उच्चायुक्त का सृजन जो भारतीय राज्य सचिव का कार्य करने वाला था |
    • केंद्रीय लोकसेवा आयोग का गठन |
    •  केंद्रीय बजट और राज्यों के बजट को अलग किया गया |
    • वैधानिक आयोग का गठन जो 10 वर्षों के कार्यों की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा |
    •  भारतीय राज्य सचिव भारत में एक कैग  नियुक्ति कर सकता था | 
      साइमन कमीशन 
    •  एक वैधानिक आयोग था जिसका नेतृत्व सर जॉन साइमन कर रहे थे |
    •  इसमें 7 सदस्य थे, सभी ब्रिटिश थे, अतः इसका भारतीयों द्वारा विरोध हुआ |
    •  1919 में जारी नए संविधान में भारत की स्थिति का पता लगाने के लिए इसका गठन किया गया था. वैसे तो इसे 1929 में 10 साल बाद में आना चाहिए था परंतु 2 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आ गया था |
    •  इसने द्वैध शासन प्रणाली,  राज्यों में सरकारों का विस्तार , ब्रिटिश भारतीय संघ की स्थापना और सांप्रदायिक निर्वाचन को जारी रखने की सिफारिश की |
    •  इस पर विचार करने हेतु  ब्रिटिश सरकार ने तीन गोलमेज सम्मेलन किए जिसमें ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत और भारतीय रियासतों के प्रतिनिधि शामिल थे |
    •  इस चर्चा के बाद पुनः इसे ब्रिटिश संसद में पेश किया गया अंततः कुछ संशोधनों के बाद इन सिफारिशों को 1935 के भारत शासन अधिनियम में शामिल कर लिया गया |
      सांप्रदायिक अवार्ड 
    • सांप्रदायिक निर्वाचन में अब दलितों के लिए भी अलग निर्वाचन व्यवस्था लागू किया गया गांधी जी ने पुणे के यरवदा जेल में इसके खिलाफ अनशन किए , कांग्रेस नेताओं और दलित नेताओं के बीच एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता के नाम से जाना जाता है संयुक्त हिंदू निर्वाचन व्यवस्था को बनाए रखा गया इसमें दलितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई |
    1935 का भारत शासन अधिनियम 
    • अखिल भारतीय संघ की स्थापना |
    •  केंद्र और राज्यों के बीच तीन सूचियां बनाई गई –    1- संघीय सूची (59 विषय ) , 2- राज्य सूची (54) , 3- समवर्ती सूची (36 विषय ) हालांकि यह संघीय व्यवस्था अस्तित्व में आई ही नहीं ( देसी रियासतों के इंकार के कारण).
    • प्रांतीय स्वायत्तता – प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त और उन्हें स्वतंत्र एवं स्वशासी अधिकार दिया गया और गवर्नर के लिए राज्य विधान परिषद का सलाह मानना आवश्यक कर दिया गया |
    • केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना संघीय विषयों को आरक्षित एवं हस्तांतरित विषयों में विभक्त किया गया |
    • संघीय न्यायालय की स्थापना परंतु अंतिम शक्ति प्रिवी काउंसिल (लंदन ) के पास था|
    •  11 राज्यों में से 6 में द्विसदनात्मक व्यवस्था लागू किया गया | 
    • सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का और विस्तार किया गया | 
    • भारत शासन अधिनियम 1858 द्वारा लागू “भारत परिषद” का अंत .
    • मताधिकार का विस्तार |
    •  मुद्रा एवं साख नियंत्रण के लिए आरबीआई की स्थापना |
    • संघ लोक सेवा आयोग,  प्रांतीय सेवा आयोग,  संयुक्त सेवा आयोग की स्थापना |
    • ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता |
    1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
    •  20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लिमेंट एटली ने घोषणा की कि 30 जून 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त हो जाएगा |
    •  मुस्लिम लीग का आंदोलन- भारत विभाजन की मांग |
    •  3 जून 1947 को माउंटबेटन योजना-  विभाजन की योजना पेश की गई और इस प्रस्ताव को कॉन्ग्रेस और मुस्लिम दोनों ने मान लिया|
    •  4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 संसद में पेश हुआ 18 जुलाई 1947 को स्वीकृत हुआ इस अधिनियम में 20 धाराएं थी |
     इस अधिनियम की निम्नलिखित विशेषताएं थी-:
          1- 15 अगस्त को स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र का सृजन|
          2- गवर्नर जनरल का सृजन |
          3- अपना संविधान एवं कानून बनाने का अधिकार |
         4- ब्रिटिश संसद में पारित कोई भी अधिनियम को 15 अगस्त 1947 के बाद नहीं मानेंगे |
         5-  ब्रिटेन में भारत सचिव का पद समाप्त  |

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