आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत

आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत की जानकारी हमें अनेक स्रोतों से मिलती है जिसमें से कुछ प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं :-

पुरालेख

आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत

सरकारी पुरालेख 

सरकारी पुरालेख के अंतर्गत केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के अभिलेखागार आते हैं, जहां केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के अधिकतर दस्तावेज संरक्षित हैं। भारत सरकार का राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली में स्थित है। ये अभिलेख केंद्रीकृत राजव्यवस्था के उदय, प्रशासनिक व्यवस्था एवं संवैधानिक व्यवस्था के विकास की जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही साथ यह प्रांतों में स्थानीय स्वशासन एवं प्रांतों के पुनर्गठन संबंधित कई जानकारियां भी उपलब्ध कराता है। इसके अंतर्गत तत्कालिक तीनों प्रेसिडेंशियों (बंगाल, मद्रास, बाॅम्बे) की संवैधानिक, राजनीतिक एवं प्रशासनिक जानकारी मिलती है।

निजी पुरालेख

निजी पुरालेख के अंतर्गत राजा महाराजाओं, शासकों एवं किसी व्यक्ति या परिवारों से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है। जिससे हम उनके व्यक्तिगत जीवन से परिचित होते हैं।

विदेशी संग्रहालय के पुरालेख

इसके अंतर्गत ऐसी पुरालेख सामग्रियां आती हैं जो हैं तो भारत के परंतु विदेशों में संरक्षित है। उदाहरणार्थ चर्च मिशनरी सोसाइटी ऑफ लंदन के पूरा लेख में भारत के शैक्षिक एवं सामाजिक विकास का वर्णन मिलता है। आर्काइव्स नेशनल पेरिस के पुरालेख में भारत में फ्रांसीसियों के इतिहास का वर्णन मिलता है। रिकसरचीफ,हेग के पुरालेख में भारत में डचों के इतिहास का वर्णन मिलता है। नेशनल आर्काइव्स ऑफ पुर्तगाल लिस्बन के पुरालेख में भारत में पुर्तगालियों के इतिहास का वर्णन मिलता है। 1947 से पूर्व के भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण जानकारी लाहौर रिकॉर्ड ऑफिस में संरक्षित है। इसी प्रकार भारतीय क्रांतिकारियों की कई महत्वपूर्ण जानकारियां यूरोपीय देशों में एवं अमेरिका में संरक्षित है।

साहित्य

भारतीय साहित्य

इसके अंतर्गत इतिहासकारों ने आधुनिक भारत की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का वर्णन किया है जिससे हमें तात्कालिक भारत को जानने और समझने का मौका मिलता है।
इसमें उपन्यासों की बड़ी भूमिका रही है। उदाहरणार्थ बंकिम चंद्र चटर्जी की आनंदमठ, मुंशी प्रेमचंद की गोदान,कफन एवं पूस की रात और फणीश्वर नाथ रेणु की मैला आंचल कुछ प्रमुख उपन्यास हैं जो तात्कालिक भारत की स्थिति को भली-भांति समझने में हमारी मदद करते हैं।

म्यूजियम (संग्रहालय)

भारतीय संग्रहालय

म्यूजियम एक ऐसा स्थान होता है जहां ऐतिहासिक विरासतों का संरक्षण किया जाता है। नई दिल्ली का नेहरू मेमोरियल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसे संगठनों के अभिलेख एवं भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से संबंधित अभिलेखों का संवर्धन करता है। इसी प्रकार कई अन्य म्यूजियम हैं जो हमें आधुनिक भारतीय इतिहास से अवगत कराता है।

यात्रा वृतांत

इसके अंतर्गत तत्कालिक भारत की यात्रा करने वाले यात्रियों ने अपने अनुभवों का वर्णन किया है। जॉर्ज फोस्टर ने अपने यात्रा वृतांत में उत्तरी भारत की राजनीतिक दशाओं के बारे में वर्णन किया है। बेंजामिन हेन ने अपने यात्रा वृतांत ‘सेवरल वर्ष वेरियस पार्ट्स ऑफ द पेनिनसुला’ में तत्कालिक भारत की आर्थिक उत्पादों की जानकारी प्रदान की। डब्ल्यू.एच.स्लीमैन के यात्रा वृत्तांत ‘जर्नी थ्रू द किंगडम ऑफ अवध’ में अवध की राजनीतिक और आर्थिक दशाओं का वर्णन मिलता है। जॉन बटलर के यात्रा वृतांत ‘ट्रेवल्स एंड एडवेंचर्स’ असम राज्य की पहाड़ी जनजातियों की प्रथाओं, आदतों एवं समाज का वर्णन करती है। जेम्स बर्न्स की यात्रा वृतांत ‘विजिट टू द कोर्ट ऑफ सिंध’ में कच्छ के बारे में जानकारी मिलती हैं।

समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं

समाचार पत्र

तात्कालिक भारत के समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं नेभी हमें उस समय के भारत की स्थिति को जानने व समझने में काफी मदद किया है। उदाहरणार्थ बाल गंगाधर तिलक के नेतृत्व में ‘केसरी’ और ‘मराठा’ का संपादन, महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘यंग इंडिया’ का संपादन, दादा भाई नौरोजी के नेतृत्व में ‘वाॅयस आॅफ इंडिया’ का संपादन और गोपाल कृष्ण गोखले के नेतृत्व में ‘सुधारक’ का संपादन। इसी प्रकार कई अन्य पत्र-पत्रिकाओं ने भी आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत को समझने में काफी मदद की है।

चित्रकला

historical indian painting
भारतीय इतिहास के चित्रकला

चित्रकला भी आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत को जानने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। 19वीं एवं 20वीं शताब्दी के चित्रकार अपने चित्रों में उस समय के दैनिक जीवन से संबंधित वस्तुओं, मुद्दों एवं परिदृश्यों का चित्रण करते थे। उदाहरणार्थ बंदूकों का चित्रण, श्रृंगार संबंधी सामानों का चित्रण, अनाज, फल एवं सब्जियों का चित्रण, बाजारों का चित्रण। साथ ही साथ यही चित्रकार कई घटनाओं 1857 की क्रांति, जलियांवाला बाग हत्याकांड इत्यादि घटनाओं का भी चित्रण करते थे, जो इतिहासकारों के लिए आधुनिक भारत के इतिहास को समझने में काफी मददगार साबित हुई है।

मौखिक प्रमाण

मौखिक प्रमाण के अंतर्गत वे ऐतिहासिक कथा एवं कहानियां आते हैं जो हम अपने बड़ों से सुनते हैं। हालांकि इन कहानियों में प्रमाणिकता एवं कालक्रम का अभाव होता है और वे स्पष्ट होते हैं फिर भी वे इतिहासकारों की अन्य स्रोतों से जुटाई जानकारी की पुष्टि करने में मदद करते हैं।

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